सिम्स प्रबंधन घुटने टेक चुकी है अव्यवस्था के आगे..चिढ रहे है डाक्टर्स

सिम्स में मरीजो का भार 1600 के पार …दिनों दिन बढ़ता जा रहा है लोड

क्या शासन प्रशासन को है इंतिजार कोई बड़ी दुर्घटना की…?

बिलासपुर—:प्रदेश कि मेडिकल कालेज सिम्स में एक तरफ दिन प्रतिदिन मरीजो की भीड़ बढ़ती जा रही है तो दूसरी तरफ शासन प्रशासन यहाँ पर फैले अव्यवस्था को निष्क्रिय होकर ताक रही है.कुछ नही छुपा है यहाँ के बारे में सब जानते है कि यहाँ भारी मात्रा में हर वर्ग कि स्टाफ कि कमी चली आ रही है सिम्स प्रबंधन ने कई बार इस अव्यवस्था को सुधारने के लिए हर स्तर पर पत्र व्यवहार कर चुकी है हर हद तक अपनी समस्या और हो रही परेशानियों को हर मौके पर बोल चुकी है यहाँ पर 350 के अनुपात में व्यवस्था पिछले 19 वर्षो से चला आ रहा है हर दिन सिम्स में 1600 से ज्यादा ओपीडी में मरीज आते है और अईपीडी में रोजाना 150 के करीब मरीज भर्ती हो रहे है.सिम्स में हर रोज सीधा रिफरल मिलने के कारण भार आज 5 गुणा से ज्यादा का जिम्मेदारी उठा रही है.जब भी सिम्स में कोई बड़ी घटना होती है तभी शासन प्रशासन जगती है और आननफान में कार्यवाही कर के चुप्पी साध लेते है पर असल में जो समस्या है उस पर कोई नजर नहीं डालना चाहता.

स्वास्थ्य विभाग के हार अधिकारी सिम्स के मामले में कमजोर सिद्ध हो चुके है बिलासपुर शहर के अंदर जिला हॉस्पिटल है जहाँ कोई भी स्तर का मरीज जाता है उसे तत्काल सिम्स रिफर कर दिया जाता है या यु कहे कि जिला हॉस्पिटल रिफरल सेंटर बन कर रह गया आस पास के करीब 8 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों से भी सभी मरीजो को सीधा सिम्स रिफर कर देते है लेकिन ऐसा होना नही चाहिए नियमतः सिम्स में वही मरीज भेजे जाते है जिसको हायर सेंटर ट्रीटमेंट कि जरूरत है पर ऐसा होता है इन सब पर बिलासपुर सीएचएमओ को संज्ञान लेना चाहिए पर वो भी इस अव्यवस्था को तिरछी नजर से देखर चुप है और भीड़ बढती जा रही सिम्स में ऐसे स्थिति में अगर मरीज का इलाज ठीक से नही हो पाएगा यह तो तय है और यहाँ के डाक्टर्स पर बढ़ रहे लोड के कारण से कभी किसी दिन कुछ न कुछ अनहोनी हो सकती है.यहाँ जो हालात है उससे चिढ गए है डाक्टर्स और चिढ में डाक्टर्स कुछ भी बोल जाते है.बिना स्टाफ के यहाँ के प्रबंधन हार मान चुकी है.प्रबंधन चाहे कितना भी बोले कि वे पूरा सिम्स के लोड को धामे हुए है पर यह सच नही है अगाहे बगाहे उनकी चिढ स्पष्ट रूप से सामने आ ही जाती है आज एक मरीज के परिजन ने जब पूछा कि वार्ड में कोई भी स्टाफ नही तो यही चिढ खुलकर सामने आया और सिम्स प्रबंधन तक बात जाने पर उन्होंने भी यही कहा कि क्या कर सकते है जब स्टाफ नही है तो मै कुछ नही कर सकता.उन्होंने कहा कि मै मरीज को भर्ती कर सकता हूँ पर नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्टाफ का काम मै नही कर सकता अब ऐसी परिस्थिति में गलती किसकी यह कौन तय करेगा.क्या शासन प्रशासन अब कोई बड़ी घटना का इंतिजार कर रही है तब जाकर यहाँ कि स्टाफ कि कमी दूर करेगी…?

ANIL & farha khan

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