आज जयंती विशेष : जिनके कर्मों में गीता और बोली में कुरान..डॉ एपीजे अब्दुल कलाम..

अध्यापक कक्षा में समझा रहे थे कि पक्षी किस प्रकार उड़ान भरते हैं और आसमान में अपना संतुलन बनाए रखते हैं। सिद्धांतों को समझाने के बाद बच्चों से पूछते हैं कि समझ आया या नहीं ? कक्षा में शांति छाई रहती है। एक बालक खड़ा होकर बोलता है – ‘मुझे समझ नहीं आया’, तब अन्य बच्चे भी कहते हैं कि हमें भी समझ नहीं आया। शिक्षक महोदय सबको समुद्र किनारे खुले स्थान पर ले चलते हैं और पक्षियों की विभिन्न कलाबाजियां, उड़ान के तरीके, संतुलन की विधियां समझाने लगते हैं। पुनः वही बालक प्रश्न करता है कि पक्षियों में इंजन कहाँ होता है और इन्हें शक्ति कहाँ से मिलती है? कक्षा पांचवीं के दस वर्ष आयु के बालक की जिज्ञासा देखकर शिक्षक आश्चर्य मिश्रित प्रसन्नता व्यक्त करते हैं। मुस्कुराते हुए बताते हैं कि पक्षियों की जो इच्छा होती है उसकी पूर्ति के लिए वे अपनी अंत:प्रेरणा से अपने शरीर से ही शक्ति प्राप्त करते हैं।
अंत:प्रेरणा से शक्ति प्राप्त करने की बातें बालक के मानस पटल पर स्थायी रूप से बैठ जाती है और जीवन भर इसी अंत:प्रेरणा से कठिन यात्रा करते हुए देश के सर्वोच्च पद को सुशोभित करते हैं।

वह शिक्षक थे श्री शिव सुब्रमण्यम अय्यर और वह जिज्ञासु बालक थे श्री एपीजे अब्दुल कलाम जो आगे चलकर देश के ग्यारहवें राष्ट्रपति के पद पर पहुंचे और पूरे देश के लिए देश सेवा का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किए।

संक्षिप्त जीवन परिचय –
डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म तमिलनाडु राज्य के रामेश्वरम में दिनांक 15 अक्टूबर 1931 को हुआ था। आपका पूरा नाम अबुल पकीर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम है। मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे कलाम ने ईमानदारी, आत्मानुशासन पिता जी से तथा ईश्वर पर विश्वास, करुणा माता जी से विरासत में पाया। बीएससी की शिक्षा सेंट जोसेफ कालेज तिरुचिरापल्ली से 1950 में प्राप्त की। मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एरोनोटिकल इंजीनियरिंग में उपाधि प्राप्त की। वरिष्ठ वैज्ञानिक सहायक के रुप में डी. टी. डी. एंड पी. के तकनीकी केंद्र में 1958 में सेवाएं दी। अंतरिक्ष अनुसंधान समिति में 1958 से 1982 तक विभिन्न पदों पर कार्य किया। विभिन्न उपलब्धियों एवं सेवाओं के लिए अनेक संस्थाओं, संगठनों से पुरस्कृत किए गए। 1981 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण, 1990 में पद्म विभूषण तथा 1997 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से सम्मानित किए गए।

25 जुलाई 2002 को देश के सर्वोच्च महामहिम राष्ट्रपति पद पर सुशोभित हुए। भारत के सर्वोच्च पद पर नियुक्ति से पहले भारत रत्न से सम्मानित होने वालों में सर्वपल्ली राधाकृष्णन और जाकिर हुसैन के बाद बाद तीसरे व्यक्ति रहे।

युवाओं के प्रेरणास्रोत –
युवाओं के दिलों पर राज करने वाले एपीजे अब्दुल कलाम आपादमस्तक लोगों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहे। आज की मिसाइल तकनीक डॉ साहब की ही देन है। मिसाइलमैन कलाम की हर एक बात निराली थी। उनके बारे में कहा जाता है कि वे कुरान और भगवद्गीता दोनों का अध्ययन करते थे। वीणा बजाने के शौकीन थे इससे उन्हें असीम शांति और शुकून मिलता था। देश सेवा ही उनके लिए सबसे बड़ा धर्म था। करोड़ों लोगों के विचारों को प्रभावित करने वाली व्यक्तित्व के धनी एपीजे अब्दुल कलाम के लिए पूरा देश ही उनका परिवार था।

सादगी एवं सरलता –
बेहद खास होकर भी आम जिंदगी बिताने वाले कलाम साहब की सादगी के कई किस्से मशहूर हैं। राष्ट्रपति भवन प्रवेश में जहाँ तमाम तामझाम को दरकिनार कर एक सामान्य नागरिक की तरह प्रवेश हो या राष्ट्रपति भवन से विदाई के समय केवल दो सूटकेस के साथ बाहर निकलना, सादगी, इमानदारी और देशसेवा की ऐसी मिसाल है जिसके उदाहरण अन्यत्र मिलना मुश्किल है।

एपीजे साहब के जीवन में जो कुछ भी मिला वे दान करते गए। संपत्ति के नाम पर उच्च आदर्शों की अमूल्य विरासत छोड़ गए। राजनीति से दूर रहकर भी राजनीति के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचे कलाम का जीवन संघर्षों और सफलता की अनूठी दास्तान है।
कलाम साहब का कथन था ख्वाब वो नहीं होते हैं, जो आप सोते हुए देखते हैं। असली ख्वाब वे होते हैं जो आपको सोने नहीं देते। कलाम साहब सदैव बच्चों को आगे बढ़ने के लिए, बड़े सपने देखने को प्रोत्साहित करते रहे। उन्होंने ऐसी-ऐसी बातें कही है जिन्हें अपनाकर कोई भी सफलता के शिखर पर पहुंच सकता है।
लोगों को मोटिवेट करते हुए ही 27 जुलाई 2015 को मेघालय के शिलांग में हृदयाघात से भारत माता का यह सच्चा सपूत अंतिम यात्रा में निकल गया।

अब्दुल कलाम स्मारक
रामेश्वर में 30 जुलाई 2015 को जहां अंतिम संस्कार किया गया था वहाँ डीआरडीओ द्वारा विशाल स्मारक का निर्माण किया गया है। कलाम साहब के रुद्रवीणा बजाते लकड़ी की प्रतिमा के साथ एसयू 30 एमआई फ्लाइट में पहने गए सूट, निजी वस्तुएं, अनेक पुरस्कार संग्रहालय में रखे गए हैं। स्मारक निर्माण के लिए देश के अनेक भागों से रामेश्वरम में निर्माण सामग्री लाई गई।

महान वैज्ञानिक, गंभीर चिंतक, सादा जीवन उच्च विचार के पर्याय एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा प्रदान करती रहेंगी।

✍🏻 राकेश नारायण बंजारे
खरसिया.

MUKESH KUMAR LAHARE

मुकेश कुमार लहरे

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