छत्तीसगढ़ में गुटखे और गुड़ाखू पर प्रतिबंध को लेकर चर्चा जारी – स्वास्थ्य मंत्री

साभार – @ http://ghotul.blogspot.com @ रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव का कहना है कि छत्तीसगढ़ में गुटखे और गुड़ाखू पर प्रतिबंध को लेकर चर्चा जारी है। इस पर प्रतिबंध एकाएक लगाया जाए या फिर धीरे-धीरे इसे लेकर सरकार विचार कर रही है। सिंहदेव ने कहा कि कमेटी बनाकर उन राज्यों का भी मुआयना कराया जा रहा है जहां गुटखा प्रतिबंधित किया जा चुका है। सिंहदेव के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि सरकार जल्दी ही गुटखा और गुड़ाखू प्रतिबंधित कर सकती है।

छत्तीसगढ के अधिकांश ग्रामीण ईलाकों में महिला और पुरुषों के बीच उपयोग जाने वाला गुडाखु की सच्चाई… जानिये.. दोस्तॉं । गुड़ाखू की फैक्ट्री यहाँ हरियाणा से आयी । तोता छाप गूडाखू कंपनी की शुरुवात खरसिया मे हुई …बाद मे बिलासपुर मे भी इसकी एक फैक्टरी लगाई गयी… आज अधिकांश लोग खरसिया का गुडाखू उपयोग करना पसंद करते है…सच है कि नही…? इसे बनाने के लिए सड़े हुए गुड़ और तम्बाकू को मिलाया  जाता है । बाद में डिबिया में भर कर मंजन के रूप में बेचा जाता है । मिलाने के किये पहले मजदूरों का प्रयोग किया जाता था , जो पैर से मसल कर इसका पेस्ट बनाते थे ।  .इस गुड़ाखु को करने से नशा हो जाता है । धीरे धीरे ग्रामीण लोग इस गुड़ाखु के आदी हो गये । कई लोग इसे दिन में बीस- बीस बार करते हैं । .इससे कैंसर , और अन्य कई भयानक रोग हो जाते हैं . लाखों लोग इस बीमारी से मर गये . हजारों परिवार इस गुड़ाखु की लत से तबाह हो चुके हैं ।

तोता, मैंना, तीतर जैसे कई अन्य गुड़ाखू फैक्ट्री संचालित हैं खरसिया में

बड़े – बड़े नेताओं का है गुड़ाखू फैक्ट्री, क्या हो पायेगा बंद ?

खरसिया गूडाखू फैक्टरी की स्थापना सबसे पहले हरियाणा से थीम लेकर खरसिया मे लखीराम के बडे भाई स्व. गजानंद अग्रवाल समेत ७ भाईयों ने की थी । शुरू में इसके प्रचार- प्रसार के लिए छत्तीसगढ़ी नाचा “गम्मत ” का प्रयोग किया …. लोगों को मुफ्त सेम्पल बांटे …. फिर आदी बनाया …. खूब कमाया … कमाई से राजनीति शुरू की .. आगे चलकर बांटवारे में खरसिया की फैक्टरी बडे भाई स्व. गजानन अग्रवाल और अन्य भाईयो के हिस्से मे आयी.. और  लखीराम अग्रवाल व बेटे अमर अग्रवाल ने बिलासपुर मे जाकर इसकी दूसरी कंपनी खोली । लखीराम और उनके बेटे ने बंटवारे में भाजपा को कब्ज़ा लिया … वहीँ आज खरसिया फैकटरी के मालिक स्व. गजानन अग्रवाल के दो बेटे मुरली अग्रवाल व अशोक अग्रवाल पार्टी के कद्दावर नेता है..  अशोक अग्रवाल चरणदास महंत के कट्टर समर्थक है, वही दूसरी ओर  मूरली अग्रवाल अजीत जोगी के खासमखास है ..। यही राजनीती है  भाई  ..।

लखीराम अग्रवाल कभी चुनाव नहीं जीत पाए । मगर गुड़ाखू के धंधे के कारण उनके पास अथाह पैसा था,  फिर बाद में छत्तीसगढ़िया लोगों की खून-पसीने की कमाई को गुड़ाखू का लत लगाकर लुटे गए, इन्ही पैसों से वे समाजसेवी भी कहलाने लगे । राजनीति में उनकी शुरुआत किसी आंदोलन से नहीं बल्कि चन्दा देने की क्षमता से ही हुई थी । भाजपा के सबसे बड़े चन्दा दाता वही थे, अतः वे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वैसे ही बन गए थे । मगर फिर भी लखीराम अग्रवाल कभी चुनाव नहीं जीत पाए अन्त में हार कर भाजपा ने लखीराम अग्रवाल को राज्यसभा में भेज दिया, जैसे कांग्रेस ने अपने सबसे बड़े चन्दा दाता जिंदल को राज्य सभा भेजा था । लखीराम राम का बेटा अमर अग्रवाल स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं । ये चिकित्सक नही  रहे, स्वास्थ्य लाभ का कोई काम नहीं जानते, फिर भी ये फिर से स्वास्थ्य मंत्री बन गए । जैसे कि इन्होने परमानेन्ट पट्टा ले रखा है इस मंत्रालय का । हाँ  इनका पूरा जीवन स्वास्थ्य खराब करने का सामान गुड़ाखू  बेचने की फैक्ट्री चलाने में बीता है । जब लखीराम थे, तब गुडाखू सबसे ज्यादा जांजगीर, रायगढ़, कोरबा, बिलासपुर और समीपवर्ती उड़ीसा में ही ज्यादा बिकता था, पर अब अमर अग्रवाल के प्रदेश सरकार  में मंत्री बनने के बाद यह नशा ” राज्य नशा ” का रूप ले चुका । अब प्रदेश के सभी स्थानों के आलावा पडोसी राज्यों में भी छत्तीसगढ़ का पहचान बन गया है ।

 

छत्तीसगढ़ में कैंसर मे बढ़ोत्तरी का सबसे बड़ा कारण गुड़ाखू है ।

प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार व फोटोग्राफर गोकुल सोनी जी बताते है कि मुझे भी याद है जब अर्जुनसिंह जी मुख्यमंत्री थे तो लखीराम जी उनके किसी बात का काफी विरोध कर रहे थे तो अर्जुनसिंह जी ने दो टूक कह दिया कि मैं मध्यप्रदेश में गुडाखू को बेन करने वाला हूं। …..लखीराम जी शांत हो गये उन्होने विरोध करना बंद कर दिया।

राज कुमार चुन्नी शर्मा जी बताते है कि  गुड़ाखू जो सड़ी हुई गुड व तम्बाखू से  दुनिया के सबसे अनहाईजनिक तरीके से बनाई जाती है .,  का मानव स्वास्थ पर बेहद घातक असर होता है ॥ फिर गुड़ाखू चाहे तोता छाप हो चाहे मैना छाप …?? हमारे प्रदेश  मे पिछले दो दशको मे इसका प्रचलन खूब बड़ा है ….. यह व्यपारीयोंओ के लिए मोटी कमाई का जरिया है किन्तु इसका प्रयोग करने वालो के लिए यह एक ऐसी अंतहीन इच्छा बन जाती है जिसके मायाजाल से निकलना बेहद कठिन है ॥ इसके प्रयोग से मुंह के कैंसर की संभावना 40% तक बढ़  जाती है … यह मानव को निर्बल कमजोर कामचोर आलसी उतेज्ज्क और नपुन्सक बनाता है …! इसके उपयोग से टीबी … अल्सर …पायरीया जैसी अनेक बीमारिया होती है …छ ग मे मुह और पेट के कैंसर की दर मे लगातार बढ़ोत्तरी का सबसे बड़ा कारण गुड़ाखू ही है |

MUKESH KUMAR LAHARE

मुकेश कुमार लहरे

One thought on “छत्तीसगढ़ में गुटखे और गुड़ाखू पर प्रतिबंध को लेकर चर्चा जारी – स्वास्थ्य मंत्री

  • October 11, 2019 at 2:33 am
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    Ji bilkul jitne bhi nasa chije hai ye sabhi ko pratibandh karna chahiye taki kai privar chayn se ji paye.

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