300 बिस्तर वाले सेटअप में 37 हजार मरीजो का इलाज प्रति वर्ष करता है सिम्स

एक वर्ष में 3 लाख से अधिक कि है ओपीडी…750 का सेटअप का भार सम्हालने में मजबूर 

बिलासपुर—-:अविभाजित म.प्र के अंतिम वर्षो में बिलासपुर मेडिकल कालेज कि जो कल्पना सुरु हुई थी वह आज भी अपूर्ण ही है तब जिला हॉस्पिटल को राज्य सरकार ने बिलासपुर विश्व विधालय को लीज पर दे दिया और किसी तरह एक नाव को धक्का देकर पानी में उतार दिया नाव डूबती तो इसमें जितने लोग सवार थे उतनी तो लाइफ सेविंग जेकिट भी नही दी गई सिम्स का जहाज आज भी वैसे ही हिचकोले खाते चल रहा है 300 बिस्तर वाली हॉस्पिटल के संचालन के लिए जो सेटअप मंजूर है उसी सेटअप में 700 बिस्तरों का हॉस्पिटल चल रहा है 17 एकड़ के परिसर में बने हुए सिम्स में सिर से पैर के नाख़ून तक कमियाँ गिनाई जा सकती है उसके बाउजुद 2018 में सिम्स कि ओपीडी में 3लाख 35 हजार 894 मरीज आए जिसमे से 37हजार 440 मरीज भर्ती हुए इसी तरह 2019 में अभी तक 2 लाख 55 हजार से ज्यादा मरीज ओपीडी में आ चुके है तथा भर्ती होने वाले मरीजो कि संख्या 29 हजार से ज्यादा है इतनी बड़ी संख्या में मरीज जब एक मेडिकल कालेज में आते जाते है तो उसे सिर्फ रिफर सेंटर नही कहा जा सकता आज भले ही सिम्स के पास कार्डियोलाजिस्ट,न्योरोलोजिस्ट नही है फिर भी सिम्स के सिमित संसाधनों में वहां के उपलब्ध चिकित्सक मरीज को बेहतर सेवा देते है ऐसे में मोस्ट वीआईपी स्वयं को अपोलो रिफर करा ले तो इसका एक मात्र कारण तकनिकी है सिम्स में स्वीपर से लेकर इलेक्ट्रिकल इंजीनियर तक के पद खाली पड़े है अथवा स्वीकृत नही किए गए असल में मेडिकल कालेज को इन्ही कि आवश्यकता है जबकि जनता को खुस करने केलिए एसी और कूलर लगाकर जनता को बहलाने कि कोशिस कि जा रही है

ANIL & farha khan

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