रेल से ढोयी जा रही दो लाख की सागौन लकड़ी पकड़ाई, तस्कर हुए फरार

जगदलपुर। दक्षिण बस्तर के लकड़ी तस्कर इन दिनों तस्करी के लिये रेल्वे का सहारा ले रहे हैं। किरंदुल से आने वाली मालगाडिय़ों में तस्कर कीमती इमारती लकड़ी भर कर दक्षिण भारत के शहरों में भेज रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में आरपीएफ ने 22 नग सागौन लकड़ी बरामद की है।

लकड़ी तस्करों ने दंतेवाड़ा जिले में 22 नग इमारती लकड़ी विशाखापट्नम की ओर जाने वाली मालगाड़ी में लोड कर दिया। इस बीच चार तस्कर मालगाड़ी में ही छिप कर बैठे रहे और कामालूर तक लकड़ी को आयरन ओर से ढक रहे थे। इस बीच कामालूर स्टेशन के पहले तस्करों ने डिब्बे का वैक्यूम पाइप खोल दिया, जिससे मालगाड़ी मौके पर ही खड़ी हो गई। गाड़ी खड़ी होते ही तस्कर भाग निकले। इंजन के ड्राइवर को इस बात की जानकारी मिलते ही मालगाड़ी को जगदलपुर की ओर बढ़ा दिया और जगदलपुर आरपीएफ को इसकी सूचना दे दी। रात करीब 11 बजे आरपीएस की टीम ने सभी डिब्बों की सर्चिंग की। एक डिब्बे में आयरन ओर के नीचे 22 नग इमारती लकड़ी मिली, जिसे आरपीएफ द्वारा जप्त कर लिया गया। रेल्वे पुलिस ने वन विभाग को सूचना दे दी।

जगदलपुर रेल्वे पुलिस के एसआई हरिहृर्शन शर्मा ने जानकारी देते बताया कि सम्भत: तस्करों ने बचेली में उक्त इमारती लकड़ी को मालगाड़ी में लोड किया होगा और उसे अयस्क से ढकने के लिये कामालूर तक मालगाड़ी तक चले। उन्होंने बताया कि मालगाड़ी रुकते ही ट्रेन चालक ने कुछ आशंका जताते हुये आरपीएफ को सूचना दे दी थी। चालक ने कामालूर स्टेशन के पहले 4 लोगों को भागते देखा है। श्री शर्मा ने बताया कि डिब्बे का वैक्यूम पाइप खोलते ही डिब्बे में ब्रेक लग जाती है। इसकी जानकारी तस्करों को पहले से ही मालूम होगी, इसी का फ ायदा तस्करों ने उठाया है, लेकिन वे अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाये। उन्होंने जप्त लकड़ी की कीमत करीब 2 लाख आंकी है।

मालगाड़ी से लकड़ी तस्करी का यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी कई बार कीमती ईमारती लकड़ी बस्तर से बाहर भेजी जाती रही है। बस्तर वनों से आच्छादित है और यहां सागौन बहुतायत में है, इसके अलावा कई कीमती ईमारती लकडिय़ां भी हंै। तस्करों ने घने जंगलों की अंधाधुंध कटाई कर बस्तर के जंगलों को भारी नुकसान पहुँचाया है। तमाम निगरानी के बाबजूद बस्तर में लकड़ी तस्कर फ लफू ल रहे हैं। वन विभाग के कड़े कानून के बावजूद यहां तस्करी चरम है और इसका सबसे बड़ा कारण तस्करों को आसानी से छोड़ा जाना है। वन विभाग को भी अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा, ताकि बस्तर के वन सुरक्षित रह सके।

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