जिला प्रशासन, यूनिसेफ और रूम-टू-रीड की संयुक्त पहल, प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने ’आकांक्षा’ प्रोग्राम का प्रशिक्षण प्रारंभ

जशपुरनगर । प्राथमिक शिक्षा गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन,यूनिसेफ एवं रूम-टू-रीड के संयुक्त तत्वाधान में जशपुर जिले में शुरू किए गए आकांक्षा नामक अभिनव कार्यक्रम को मूर्त रूप देने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण देने का काम आज से दुलदुला में शुरू हुआ। यहां यूनिसेफ की सुश्री शिखा राणा के मार्गदर्शन में यूनिसेफ और रूम-टू-रीड के 8 विशेषज्ञ 140 चयनित शिक्षकों, संकुल केन्द्र समन्वयकों एवं शिक्षा अधिकारियों को 4 दिन का प्रशिक्षण दे रहे है। यहां यह उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन द्वारा प्रथम चरण में आकांक्षा कार्यक्रम को पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में जिले के दुलदुला विकासखंड में शुरू किया गया है। दुलदुला ब्लाॅक के सभी 109 प्राथमिक स्कूलों में यह कार्यक्रम संचालित होगा। आकांक्षा कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं उनके शारीरिक, बौद्धिक विकास को बढ़ावा देना है। जिला प्रशासन एवं यूनिसेफ द्वारा आकांक्षा कार्यक्रम के बेहतर क्रियान्वयन के लिए बेस लाईन मैपिंग एवं सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी श्री एन.कुजूर एवं संकल्प के प्राचार्य विनोद गुप्ता ने आज संयुक्त रूप से दुलदुला के पुस्तकालय सह वाचनालय में मास्टर ट्रेनर सुश्री शिखा राणा, राकेश कुमार, हेमन्त साहू, मुकेश कुमार चैधरी, मोहसिन शाह, परमेन्दर नागे, भूषणलाल सिन्हा, श्रीमती तनीशा साहू, श्रीमती विजयलक्ष्मी देवांगन द्वारा दिए जा रहे प्रशिक्षण का मुआयाना किया। जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि जिले में प्राथमिक शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए यह कार्यक्रम पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर दुलदुला विकासखंड में शुरू किया गया है। इस प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे जिले के सभी विकासखण्डों में लागू किया जाएगा।
यूनिसेफ की शिखा राणा ने बताया कि आकांक्षा कार्यक्रम के माध्यम से प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों की भाषा सुधार का विशेष प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाषा ही शिक्षा की बुनियाद है। इसके बिना किसी भी विषय की पढ़ाई एवं अभिव्यक्ति ठीक ढंग से नहीं हो सकती है। भाषा को कैसे समझ के साथ पढ़ाया जाए, यह प्रशिक्षण शिक्षकों को दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों को भाषा सीखने के लिए रटने की पद्धति से अध्ययन अध्यापन कराया जाता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से समझने वाली पद्धति से बच्चों को भाषा ज्ञान कराया जाएगा, ताकि दो साल भीतर बच्चे भाषा को बेहतर तरीके से पढ़ना लिखना और समझना सीखें। उन्होंने बताया कि इस चार दिवसीय प्रशिक्षण में दो दिन सैद्धान्तिक प्रशिक्षण तथा दो दिन का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि आगामी एक साल तक प्रत्येक तीन माह के बाद चार-चार दिन का प्रशिक्षण आयोजित होगा। प्रत्येक माह यूनिसेफ की टीम दुलदुला ब्लाॅक के स्कूलों का विजिट कर अध्ययन अध्यापन की स्थिति का मूल्यांकन करेंगी।
दुलदुला ब्लाॅक के सभी 109 स्कूलों में लाईब्रेरी स्थापित की जाएगी। इसमें बच्चों की उम्र के हिसाब से उनके बौद्धिक विकास के लिए पुस्तकें होंगी। इसके लिए यूनिसेफ एवं रूम टू रीड द्वारा अनुशंसित लगभग 250 पुस्तकें सभी स्कूलो को उपलब्ध कराई जा रही है। बच्चों के शारीरिक विकास के लिए स्पोर्ट्स फाॅर डेव्लपमेंट प्रोजेक्ट भी शुरू किया गया।

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