शुरू हुई नागरिक मोर्चे की हलचल

कांग्रेस-भाजपा के नापाक घालमेल के विरुद्ध मोर्चे बंदी

मठाधीशों को घेरने की तैयारी

दिनेश मिश्रा वरिष्ट पत्रकार

रायगढ़। नगरनिगम के मामले में शहरवासियों का अनुभव अच्छा नहीं रहा है। निगम हेतु जनता द्वारा चुने गये प्रतिनिधियों ने इस प्यारे शहर को चारागाह समझ कर जिस बुरी तरह से लूटा-खसोटा है , उसे देखकर आम लोगों के मन में भारी गुस्सा है। कांग्रेस व भाजपा दोनों प्रमुख दलों के मुठ्ठीभर धूर्त लोगों के एक शातिर गिरोह ने निगम को भ्रष्टाचार का अड्डा बना रखा है। ये लोग निगम चुनाव के समय टिकिट वितरण के दौरान ही आपसी घालमेल द्वारा एक दूसरे के खिलाफ कमजोर उम्मीदवार की व्यवस्था कर लेते हैं। ये लोग हमेशा इस बात के प्रति सजग रहते हैं कि उनका कोई विकल्प पैदा न होने पाये। चूंकि इस गिरोह में दोनों पार्टियों के सभी गुट के नेता शामिल हैं अतः ठीक समय पर एक दूसरे को गोपनीय सूचनाओं का आदान-प्रदान करके ये लोग नये उभरने वाले वैकल्पिक प्रतिस्पर्धियों की भ्रूण हत्या कर देते हैं। पिछले बीस-पच्चीस वर्षों से यह खेल शहर की राजनीति में बेरोकटोक चल रहा है। इसी नापाक गठबंधन के कारण कुछ लोग चार-पांच चुनाव जीतकर अजेय बने हुये हैं। अपने-अपने वार्डों में सेवक के रूप में विनम्र बने रहने वाले ये लोग वास्तव में न तो विनम्र हैं और न पाक दामन हैं। ये लोग ही दरअसल शहर के व्यवस्थित विकास में सबसे बड़े बाधक हैं। बड़े बिल्डरों, ठेकेदारों, जमीनखोरों, कोल माफियाओं व पूंजीपतियों के पॉलिटिकल एजेंट व छोटे पार्टनर के रूप में अपनी जेबें गर्म कर लेने वाले इन्हीं लोगों ने शहर को कबाड़खाना बना दिया है। शहर इन तत्वों से अब छुटकारा पाना चाहता है। इसी विचार के साथ दलीय निष्ठाओं से ऊपर शहर के वास्तविक मुद्दों के लिये लड़ने हेतु एक नागरिक मोर्चे के गठन की जरूरत महसूस की जा रही थी। जानकारी के अनुसार कल शहर के वयोवृद्ध एक्टिविस्ट व बुद्धिजीवी शिवशरण पांडेय जी की अध्यक्षता में विचारवान लोगों की एक बैठक सम्पन्न हुई है। बैठक में इस दिशा में पहल हेतु विचार मंथन के बाद नागरिक मोर्चे की ओर से निर्दलीय प्रत्याशी खड़ा करके शहरवासियों को तीसरा विकल्प देने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय का स्वागत किया जाना चाहिये। नागरिक मोर्चे को भी स्थितियों पर गंभीरता से विचार विमर्श करके सधी हुई रणनीति के साथ वर्षों से मठाधीश बनकर बैठे हुये भ्रष्ट तत्वों की तगड़ी घेरेबंदी करनी चाहिये। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिये कि उनका प्रत्याशी केवल वोट कटवा बनकर इन्हीं मठाधीशों की जीत का मार्ग प्रशस्त न कर दे। साथ ही इन दबंग किस्म के नेताओं के वार्ड में निवासरत बुद्धिजीवी नागरिकों को भी इस बात को देखना चाहिये कि बार- बार चुने जाने वाले इन सेवकनुमा लोगों का वार्ड के बाहर असली चरित्र व आचरण क्या है तथा इस बार इन्हें हटाकर यह संदेश देना चाहिये कि इस तरह का दोहरापन बर्दास्त नहीं किया जायेगा। शहर के अन्य प्रभावशाली लोगों को भी थोड़ा समय निकालकर इन वार्डों में रहने वाले अपने परिचित वोटर को इनके विरुद्ध मतदान करने हेतु प्रेरित करना चाहिये ताकि जनहित में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके

बहरहाल यह देखने वाली बात होगी कि नागरिक मोर्चा क्या कदम उठाता है और इस चक्रव्यूह को तोड़ पाने में कितना कारगर होता है

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