शहर में महापुरूषों की प्रतिमाएं हो रही धूल-धूसरित, आखिर कहां गए जनप्रतिनिधि व समाज के ठेकेदार

रायगढ़। इन दिनों शहर के विभिन्न चौक चौराहों व स्थानों पर स्थापित किये गये महापुरुषों की प्रतिमायें धूल धूसरित हो रही है। आम तौर पर किसी महापुरूष की जयंती या राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर उन्हें याद किया जाता है और प्रतिमाओं की साफ-सफाई कर उन्हें फुल मालाएं चढ़ाई जाती है। मगर उसके दूसरे दिन से ही राजनेता से लेकर समाजसेवा के ठेकेदार और जनसंगठनों से लेकर पालिका व प्रशासन के जिमेदार इन प्रतिमाओं की अनदेखी करने लगते हैं जिसके कारण ये प्रतिमाएं उपेक्षा का शिकार हो रही हैं। स्थानीय जिला न्यायालय के समीप संविधान निर्माता डा भीमराव अबेडकर की प्रतिमा , जिला कलेक्टर कार्यालय गेट के पास राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व अन्य महापुरुषों की प्रतिमा , गाँधी प्रतिमा चौक पर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा सहित शहर मे लगे कई महापुरुषों की प्रतिमाओं मे धूल की मोटी परत देखी जा सकती है। इन महापुरुषों की धूल धूसरित प्रतिमाओं को देखकर यह अन्दाजा लगाया जा सकता है कि इन महापुरुषों की प्रतिमाओं को सहेजने व रखरखाव हेतु जिला प्रशासन , स्थानीय नेता व सामाजिक संगठन कितने सजग हैवैसे तो विशेष दिवस व जयन्ती के अवसर पर स्थानीय नेता व सामाजिक संगठन एक दिन के लिये मीडिया मे अपनी जगह बनाने के लिये साफ सफाई व प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर अपनी जगह बना लेते हैं उसके अगले ही दिन से इन नेताओं व सामाजिक कार्यकर्ताओं को कोई लेना देना नही होता एक ओर जिला प्रशासन व नगर निगम भी इन प्रतिमाओं के सही रखरखाव को लेकर सजग नही है और न ही अपने कर्तव्यों व दायित्वों का पालन करते हैं तो वहीं स्थानीय नेता व सामाजिक कार्यकर्ता केवल इन प्रतिमाओं की आड़ मे जयन्ती व विशेष अवसर पर राजनीति कर या मीडिया में जगह बना लेते हैं इसके अगले ही दिन ये अधिकारी, नेता व सामाजिक कार्यकर्ता कहाँ घुस जाते हैं यह समझ से परे है। न्याय के मन्दिर जिला न्यायालय रायगढ के पास स्थित संविधान निर्माता डा भीमराव अबेडकर की प्रतिमा व जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व अन्य महापुरुषों की प्रतिमाओं पर लगी मोटी धूल की परत को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है इन प्रतिमाओं के उचित रखरखाव को लेकर जिला प्रशासन, नगर निगम व स्थानीय नेता, मंत्री, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता व स्थानीय लोग कितने सजग है। वहीं एक सवाल खुद अपने से करने की आवश्यकता है कि देश के लिये अपने जान लगाकर प्राण न्यौछावर करने वाले इन महापुरुषों की प्रतिमाओं की साफ सफाई व उचित रखरखाव को लेकर वर्तमान पीढी कितनी जिम्मेदार है।

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